आम आदमी पार्टी की सुनामी

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जनता के नब्ज को पकड़ पाने का इल्म शायद अभी भी हमारे देश में मीडिया और बुद्धिजीवियों के बस की बात नहीं है। लोकसभा के चुनावों में अपार सफलता पाने वाली भाजपा दिल्ली के चुनावों में अपना वजूद बचाने का संघर्ष करती दिखी। न तो लोकसभा चुनावों में न ही इस विधानसभा चुनाव में कोई जनता के मूड को सही-सही टटोल सका। केजरीवाल की सफलता ने साबित कर दिया कि कोई भी पाटभर्् जनता को हल्के में नहीं ले सकती। जनता का प्यार कब किसे मिल जायेगा ये शायद जीतने वाली पार्टियां भी सही-सही नहीं बता सकती है।
इस जीत ने केजरीवाल को एक ऐसी जिम्मेवारी दी है, जिसे पिछले बार वो निभाने से बचते नजर आये। उम्मीद है इस बार उन्होंने पिछली गलतियों से सबक ले लिया होगा। इस बार वो सही काम करते नजर आयेंगे जिसकी जनता को उनसे अपेक्षा है। वरना वो जानते हैं कि सारी लहरें, सारी सुनामी बस पांच साल की ही मेहमान होती है। मगर जनता के पक्ष में किये गये काम देर तक साथ चलती है।

भाजपा के लिये ये समय चिंतन का है आत्ममंथन का है। आकाश में उड़ने वाली पतंग धागा टूटने के बाद जितनी तेजी से नीचे आती है उसी अंदाज में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस हार के बाद नीचे आया होगा। उम्मीद है कि वो अब राजनीतिक जुमलों के बदले कुछ ठोस जनता के सामने पेश करेंगे। लोकसभा में पांच साल तो उनता ने उन्हें दे दिया मगर पूरे देश के विधानसभा चुनावों में उनसे हिसाब लेते रहेंगे।

आम आदमी पार्टी इस जीत के बाद अब देश के दूसरे भागों में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश करेगी। लोकसभा के चुनावों ने पार्टी का मनोबल काफी गिराया था पर पंजाब और महाराष्ट्र में उसका संगठन अभी भी मजबूत है। आने वाले पंजाब के विधानसभा में वो निश्चित तौर पर पसंदीदा बनकर सामने आयेगी। पार्टी को ध्यान देना होगा कि उनके साथ ऐसे लोग फिर से न जुड़ जायें जो अवसरवादी हो। सत्तारूपी गुड़ पर ऐसी मक्खियां हमेशा भिनभिनाती है। लोकसभा चुनाव ने ऐसे कई लोग जुड़े भी थे पर उम्मीद है ये जीत पार्टी को और परिपक्व करेगी।

आम आदमी पार्टी की ये जीत दूसरे राज्यों के क्षेत्रीय दलों को भी संजीवनी देने का काम करेगी। खास कर बिहार में जहां चुनाव जल्द होने वाले हैं। राजद और जदयू दोनों इस जीत को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेंगे। बंगाल और उत्तरप्रदेश में तृणमूल और समाजवादी पार्टी भी आम आदमी पार्टी की जीत से ज्यादा भाजपा के हार पर खुश हो रही होगी। 

लोकतंत्र की खुबसूरती भी यही है। यहां पर पार्टी हर व्यक्ति को मौका मिल सकता है और मिलता भी है। कल मोदी को ये मौका मिला था आज केजरीवाल को मिला है। दोनों के हाथ मेें अब दिल्ली का भविष्य है। सात सांसदों के साथ भाजपा और 67 विधायकों के साथ आम आदमी पार्टी दिल्ली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचायें आज शायद सारी दिल्ली यही सोच रही होगी। 

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