उत्तर प्रदेश के हालत

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badaun-rapecase.jpgसरकार बदलने और अच्छे दिन के के सपने देखने वाले लोगों को लगता है अभी इंतज़ार करना पड़ेगा। अपने निर्णयों में परिपक्वता दिखाने के बावजूद नई सरकार के सामने अभी कई मुसीबतें अभी बाकी हैं। इन मुसीबतों में कुछ सबसे बड़ी मुसीबतें बिजली और क़ानून व्यवस्था की हैं। जहाँ एक ओर राजधानी दिल्ली में जनता बिजली और पानी की समस्या से दो-चार हो रही है वहीँ दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश में अराजकता जैसा माहौल बन गया है। ऐसा लग रहा है कि वहां कोई भी सुरक्षित नहीं है। कुछ दिनों के भीतर ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के दो नेताओं की हत्या की जा चुकी है।
पिछले एक महीने को अगर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश के लिए ये दिन बिलकुल भूल जाने वाले भयानक ख्वाब की तरह से गुजरे हैं। बदायूं में दो बच्चियों की निर्मम हत्या ने तो जैसे झकझोर सा दिया है। अच्छे दिन के आशा में उत्तर प्रदेश के लगभग सभी वर्गों ने भाजपा को वोट दिया था। भाजपा ने रिकॉर्ड जीत हासिल भी की है। पर वो अच्छे दिन कैसे आएंगे ये भाजपा के साथ-साथ एनडीए सरकार को देश के सामने रखना चाहिए। राष्ट्रपति के अभिभाषण हो या प्रधानमंत्री का कहीं दिया गया भाषण सभी आशा का संचार तो जरूर करते हैं मगर जब नज़र इन भाषणों से हटकर सच्चाई की धरती पर आती है तो वही बदायूं और वही मुज़फ्फरनगर नज़र आता है। संयुक्त राष्ट्र के इस मुद्दे पर कहे जाने के बाद मोदी सरकार के सामने इस बात की चुनौती है कि देश की महिलाओं और बच्चियों को कैसे सुरक्षित रखें।

babubeta.jpgअपने अभूतपूर्व जीत के बाद उत्तर प्रदेश में सत्ता की सीढयों पर चढ़ने वाली समाजवादी पार्टी से प्रदेश को काफी उम्मीदें थी। ये उम्मीद खास कर अखिलेश यादव से थीं जो युवा युवा होने के नाते ऊर्जा से भरपूर थे। पर अब ऐसा लगने लगा है कि मुख्यमंत्री भले ही युवा हैं उनकी सोच युवा नहीं है। वो भी अपने पिता मुलायम सिंह यादव या फिर चाचा रामगोपाल की तरह पुरानी मानसिकता से ग्रस्त हैं। अच्छे अधिकारीयों का तबादला जारी है और जो काम के बदले नेताओं की ड्यूटी निभा रहे हैं उन्हें रेवड़ियां बांटी जा रही है। अखिलेश को जल्द इन सभी से बाहर निकलना होगा। पर कैसे ये बड़ा सवाल है।

भाजपा नेताओं की हत्या से जातिवादी राजनीति से पहले ही जूझ रहा उत्तर प्रदेश में राजनितिक विद्वेष भी दिखने लगा है। इस विद्वेष की परिणीति हत्या के रूप में हो रही है देखकर सिहरन सी भी होने लगी है। इन हत्याओं के बाद आगे क्या ये भी प्रश्न है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण वहां अच्छे अधिकारीयों या पुलिसकर्मी की कमी नहीं है। बस जरूरत है उन्हें पहचानने की। उनकी सेवाओं का उपयोग करने की जिससे प्रदेश की हालत में सुधार आ सके। क्या मोदी सरकार का अखिलेश से संवाद स्थापित होगा ? क्या मोदी अखिलेश को अच्छे दिन लाने के लिए प्रेरित करेंगे ?

उम्मीद है देश और उत्तर प्रदेश ने जो जनाधार दिया है उसका अच्छा परिणाम सामने आये। क़ानून व्यवस्था एक बार फिर से पटरी पर लौटे और हत्या, लूट और बलात्कार के बदले विकास और सद्भावना का दर्शन हो।

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