घोटालों की परिभाषा

| 1 Comment | Google
Chidambaram_Kapil_Sibal.jpgसंसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने ही वाला है. सभी राजनितिक पार्टियां अपनी रणनीतियों को बनाने के अंतिम दौर में है. कई मुश्किलों के बावजूद सरकार इस बार आक्रामक दिखने की कोशिश कर रही है. मंत्रिमंडल में बदलाव के बाद सरकार के लिए ये सत्र बहुत महत्वपूर्ण है. कई बिलों पर बहस के अलावा इस बार कोयले के घोटाले पर भी बहस हो सकती है. सरकार विपक्ष के हमले से बचने के लिए अभी से ही सक्रिय हो गयी है. घोटालों का निकला हुआ जिन्न को दुबारा बोतल में डालने का प्रयास शुरू हो गया है. 2 जी की बोली में टेलिकॉम कंपनियों के तरफ से मिली ठंडी प्रतिक्रिया ने सरकार को नए तर्क गढ़ने का मौका दे दिया है. सरकार के मंत्रियों ने इसे क्लीन-चिट के तौर पर जनता के सामने पेश किया है.
इस बोली के बहाने सरकार फिर उसी लाइन पर चलने  जा रही है जिसमें उसके मंत्री इस घोटाले को जीरो लॉस का बताते रहे. एक बार फिर से घोटाले को को ढकने-छुपाने का काम शुरू हो गया है. सभी नेता अब इस घोटाले को अब घोटाला मानने से भी इनकार कर रहे है. पर सभी प्रश्न का उत्तर मिल गया है ऐसा लगता नहीं है. क्या फिर से 122  लाइसेंस जो सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिए थे सभी आवंटित हो पायेंगें? क्या 2008 में 2  जी का जो महत्व था आज 4 जी के दौर में उसी तरह महत्वपूर्ण है? क्या समय का कोई महत्व नहीं? जो मंत्री और और अधिकारी जेल गए उनका क्या होगा? और सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सीबीआई ने भी घोटाले को माना था भले ही नुकसान की राशि घटा दी थी क्या सरकार अब सीबीआई को भी झुठला देगी.

संवैधानिक संस्था कैग पर प्रहार जारी है. किसी के हित में न होते हुए भी प्रहारों का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है. शायद कोई भी ये सोचने की स्थिति में नहीं है कि एक सवैधानिक संस्था के कमजोर होने से बाकियों का कमजोर होना भी तय है. लोकतंत्र के लिए इससे बड़ा खतरा तो कोई हो ही नहीं सकता. एक बार टूट जाने के बाद जनता के बीच किसी भी संस्था या सरकार के प्रति जनता में दुबारा विश्वास जगाना काफी कठिन हो जाता है. पुरे संसार में इसके उदाहरण भरे पड़े है.

बावजूद इसके सरकार अब बचाव कि मुद्रा में दिखना नहीं चाहती. ममता बनर्जी के समर्थन वापस लेने के बाद सरकार अब किसी भी सहयोगी या फिर विपक्ष के दबाव में नहीं आना चाहती है. राहुल गाँधी को चुनावों कि बागडोर सौंप कर कांग्रेस पार्टी ने भी चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है. मुलायम सिंह ने तो एक कदम आगे बढ़ते हुए उम्मीदवारों की लिस्ट भी जारी कर दी है. यानी राजनीति पूरी तरह गर्म हो रही है. सरकार के कमर कसने के साथ अगर देखा जाये तो विपक्ष भी पूरी तैयारी में है. कम से कम एफडीआई के मुद्दे पर तो अल्पमत में दिख रही सरकार पर विपक्ष जरूर वार करना चाहेगा.

संसद के चलने की उम्मीद इस बार राजनितिक दलों के साथ-साथ जनता को भी है. कई मुद्दे जो छूटे पड़े है इस बार उन पर सार्थक बहस की उम्मीद जनता को है. अगर पूरा सत्र बिना हंगामे के काम-काज के साथ निपटे तो जो सवाल आज संसद के कामकाज को लेकर उठ रहे है उनपर पूर्णविराम लग जाएगा.

1 Comment

kaafi shandaar dhang se ghotalon ki paribhasha batai gayi hai.

Leave a comment