घोटालों की सरकार

| 1 Comment | Google
pm.jpgवो घोटाले, जिसकी गूँज काफी दिनों से जनता के बीच सुनाई दे रही थी, ने आज संसद में भी अपना दस्तक दे दिया. मीडिया और जनता काफी दिनों से इसके ऊपर बहस कर रहे थे. मामला देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा है. या यूँ कहें इमानदार प्रधानमंत्री से जुड़ा है. इसलिए इस विषय काफी संवेदनशीलता काफी बढ़ जाती है. विपक्षी पार्टियाँ और जनता के नुमाइन्दो के रूप में टीम अन्ना और रामदेव इस मसले को कई महीने पहले उठा चुके है. अनाधिकारिक रूप से कैग रिपोर्ट का हवाला ये लोग देते रहे है. पर इसे सरकार की ओर टाला जाता रहा है. पर आज इस रिपोर्ट के संसद में पेश होते ही हमला करने वालों की हथियार को नई धार मिल गयी.
एक के बाद एक सामने आ रहे घोटालों ने जनता को ये सोचने पर मजबूर किया है कि यह देश गरीबों का जरूर है मगर गरीब नहीं है. घोटालों में सामने आ रही रकम के आंकड़ों से लोग हैरान है. लाखों करोड़ों के वारे न्यारे करने वालों का असली चेहरा देखने के लिए देश की आम, गरीब परेशान है. मगर सरकार है जो मानने को तैयार ही नहीं कि कोई घोटाला भी हुआ है.

अब इस हालत में जनता किसकी सुने किसकी माने. तकनीकी घालमेल कर इसे जनता के समझ से दूर करने कि पूरी कोशिश कि जा रही है. मुद्दों को पॉलिसी और प्रक्रिया के पीछे छुपाने कि कोशिशें कि जा रही है. जनता हतप्रभ है. पर क्या असली मुद्दे छुप सकेंगे? जनता एक बार फिर से उन्ही छलावों में आ जायेगी?

यही होता आया है शायद आगे भी यही होगा. सड़क पर नारे और संसद में तू-तू मैं-मैं यही सुनना जनता कि नियति बन गयी है. छः महीने, साल इन्ही कवायदों में निकल जायेगे. उसके बाद भी शायद जांच हो ही नहीं.

अगर जांच हो भी तो क्या कोई सामने आएगा? कोई जांच एजेंसी बगैर दबाव के जांच कर पाएगी? आखिर प्रधानमंत्री का मामला है, दुसरे शब्दों में कहा जाए तो पूरे सरकार का मामला है. एक मुद्दा और भी है, क्या इस मामले के उठने के बाद लगभग रेंग कर चल रही सरकार कहीं बिलकुल न रुक जाए. आने वाले 2 सालों में में कोई निर्णय ही न हो और जनता, जिसका इन घोटालों में कोई योगदान नहीं है, उन्हें गरीबी, महंगाई और  भ्रष्टाचार, का तिहरा मार न झेलना पड़े.

1 Comment

अगर इस देश में भ्रष्टाचार न रहे और घोटाले बंद हो जाये तो ये देश अमीरों का हो जायेगा ....

Leave a comment