लोकसभा का एग्जिट पोल

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exit-poll-2014.jpgचुनावों का आखिरी दौर समाप्त होने और उसके तुरन्त बाद एग्जिट पोल के दिखाए जाने के बाद गहमा-गहमी अपने चरम पर है। आने वाले दो दिन तक अब मीडिया और चौक-चौराहे इसी चर्चा में गुजारेंगे कि एनडीए को कितनी सीटें आयेंगी। सबसे ज्यादा ध्यान लोगों का भाजपा की सीटों को लेकर है। जितनी ज्यादा भाजपा की सीटें उतना बड़ा नरेन्द्र मोदी का कद। आम मतदाता से लेकर मीडिया और विपक्षी दल भी ये जानने को बेहद उत्सुक है कि नरेन्द्र मोदी का कद कितना बढने वाला है। पिछले एक दशक से लगातार विपक्षी पार्टियों, एनजीओ और एक मीडिया वर्ग का आलोचना झेल रहे नरेन्द्र मोदी का इस तरह से राष्ट्रीय परिदृश्य पर प्रभावी दस्तक का अनुमान लगभग सभी एग्जिट पोल लगा रहे हैं।
ये लगभग निश्चित सा लग रहा था कि कांग्रेस पार्टी ने पिछले एक-दो साल में अपनी काफी साख गवांई है। घोटालों की फेहरिस्त हो या फ़िर महंगाई और बेरोजगारी पर बात, कांग्रेस पार्टी कहीं भी विपक्षी पार्टी के सवालों क ज़वाब नहीँ दे पा रही थी। मतदाताओं के मन में एक स्वाभाविक रोष कहीं न कहीं पनप रह था। इस रोष को एक आवाज़ की ज़रुरत थी। इसे दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने बखुबी भुनाया था।  मगर सरकार से बीच में निकल जाने का निर्णय उनके लिये आत्मघाती साबित हुए। आम मतदाता उनके इस कदम से शायद खुश नहीं था। अब लगता है एग्जिट पोल के अनुसार आम आदमी पार्टी को इन सभी बातों का ख़ामियाजा भुगतना पडा है। एक समय भ्रष्टाचार के विरूद्ध जनता को झकझोर देने वाली पार्टी का ऐसा प्रदर्शन काफी निराश करता है।

नरेंद्र मोदी ऐसा लगता है कि इस चुनाव में सबसे प्रभावी चुनाव प्रचार का नेतृत्व का कमान सम्भाले हुए थे। उनके रैलियों, सभाओं और चाय पर चौपाल जैसे कार्यक्रम का जवाब देश के किसी भी नेता के पास नहीं था। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सभी पार्टियां नरेन्द्र मोदी पर निशाना साध रहीं थी और मोदी इन हमलों में और तप कर निकल रहे थे। आने वाले दिनों में मोदी के बारे में बहुत कुछ लिखा जाएगा, पढा जायेगा। उनके मेहनत, लगन और फिटनेस के कई चर्चे होंगे। एग्जिट पोल के मुतबिक अगर वो प्रधानमंत्री बन गये तो तो उनलोगों को भी मोदी की तारीफ करनी होंगी जो कभी उनके घोर आलोचक रहे होंगे। राजनीति का यही तो खेल है।

एग्जिट पोल एक धारणा तो जरूर बनाता है। भले ही कोई सटीक भविश्यवाणी नहि की जा सकती मगर एक मोटा-मोटा अनुमान जरूर लगता है। जनता एग्जिट पोल का आनन्द उठा रही है, अपने तौर पर विश्लेषण भी कर रही है। अब इंतज़ार है १६ मई का जब विशलेषण असलि परिणामों के साथ होंगे। .... तब तक एग्जिट पोल से ही क्यों न काम चलाया जाये। ......

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