आईसीसी का बदलाव

| No Comments | Google
Cricket.jpgजिसकी लाठी उसकी भैंस कहावत को अगर कोई आज के दिन में सबसे अच्छी तरह से चरितार्थ कर रहा है तो वो है बीसीसीआई। आईसीसी में अपना वर्चस्व साबित करने का गाहे-बेगाहे मौके ढूंढ़ने वाले बीसीसीआई को अब मौका नहीं ढूँढना पड़ेगा। भले ही अपने इस प्रस्ताव में भारत ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को भी जोड़ लिया है मगर पैसों कि स्थिति देखते हुए लगता नहीं कि इन दोनों की ज्यादा चलने वाली है। क्रिकेट में आने वाले पैसे को लेकर हमेशा से भारत की हेकड़ी चलती रही है और अब ढांचागत परिवर्तन के बाद इस हेकड़ी के और कई गुना बढ़ जाने की उम्मीद है।
तीन देशों के महत्वपूर्ण भूमिका पर पहले बाकी सारे सदस्यों की कई आपत्तियां थी। इन आपत्तियों को उठाने से साउथ अफ्रीका कि सबसे महत्वपूर्ण भूमिका थी। पर आखिरी समय में उन्होंने अपना मन बदलकर आईसीसी में बदलाव को मान ही लिया। पाकिस्तान और श्रीलंका ने बैठक में न आकर ये तो स्पष्ट कर ही दिया कि आईसीसी एक नहीं है। पर साउथ अफ्रीका समेत आठ सदस्यों ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगाकर भारत को आईसीसी का सिरमौर बना दिया। एन श्रीनिवासन अब जुलाई के बाद आईसीसी के अध्यक्ष बन जायेंगे।

कहने को तो इससे बेहतर प्रशासन होगा ज्यादा राजस्व आएगा मगर इससे क्रिकेट का खेल जो पहले से ही सिमटा हुआ है उसके और सिमट जाने का खतरा बना रहेगा। इस खेल में आने वाले दर्शकों की संख्या अब सिर्फ भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में ही है। अन्य जगहों पर ज्यादातर मैदान खली ही मिलते है। पाकिस्तान में इक्का-दुक्का अपवादों को छोड़कर अंतरष्ट्रीय मैच बंद ही हैं। बांग्लादेश में दर्शकों का टोटा भले ही न हो पर खेल में उनकी साख सबसे नीची है। इस कारण ज्यादातर बड़े देश उनसे खेलने से कतराते हैं। न्यूज़ीलैण्ड में क्रिकेट देखने भले ही लोग न आते हो रग्बी में मैदान भरे रहते हैं। साउथ अफ्रीका भी रग्बी का दीवाना देश है। कुल मिलाकर ये खतरा बना पड़ा है कि खेल से ज्यादा कहीं अब पैसों और पॉवर की आईसीसी में महत्व न बढ़ जाए।

इस बात का भी बारीक विश्लेषण होना चाहिए की टेस्ट क्रिकेट की आत्मा को कैसे न मरने दिया जाए। पैसों की होड़ में अगर बड़े तीन देशों ने अपने टी-२० लीग पर ज्यादा ध्यान दिया या फिर इनके लिए कोई खास प्रावधान किया तो क्रिकेट जरूर सिमटेगा। आईपीएल और बिग बैश जैसे टूर्नामेंट के लिए अगर स्पेशल विंडो बना तो छोटे देशों का टेस्ट क्रिकेट बुरी तरह प्रभावित होगा।

आगे क्या होगा ये तो भविष्य बतायेगा मगर सुर अभी से अच्छे नहीं लग रहे। पाकिस्तान और श्रीलंका ने एक नमूना बैठक में दिखा ही दिया है। उम्मीद किया जाना चाहिए कि हर दौर की परेशानियों के बावजूद जिस तरह दर्शकों का प्यार इस खेल पर बना रहा आगे भी बना रहेगा। पर फिलहाल तो सिर्फ दुआ ही की जा सकता है।

Leave a comment

Recent Assets

  • gopninath-munde.jpg
  • exit-poll-2014.jpg
  • Cricket.jpg
  • sachin-bharat-ratna.jpg
  • sachin_last.jpg
  • treasure_chest.jpg
  • Sacchin T.jpg
  • pran.gif
  • khan-jia.jpg
  • jiyakhan.jpg

June 2014

Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat
1 2 3 4 5 6 7
8 9 10 11 12 13 14
15 16 17 18 19 20 21
22 23 24 25 26 27 28
29 30