सचिन का सन्यास II

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Sacchin T.jpgसचमुच ऐसा लग रहा है जैसे कुछ छुट रहा है, बिखर रहा है. सचमुच यकीन करना मुश्किल है कि कोई दिन ऐसा आएगा जिस दिन के बाद सचिन तेंदुलकर जैसा किवदंती मैदान में खेलता हुआ नहीं दिखेगा. पिछले ढाई दशकों में बिना सचिन के क्रिकेट के बारे में सोचना भी मुश्किल था. भारत जैसे देश में जहाँ खेलों के प्रति अभी भी रूचि उस स्तर पर नहीं पहुंची है वहां अपने खेलने के दौरान की भगवान का तमगा पा लेना सचिन की काबलियत को दर्शाता है. जिस देश में जहाँ राजनीति, भ्रष्टाचार, अपराध, अशिक्षा, गरीबी सभी चीजों को देखकर निराशा होती है वहीँ सचिन को देखकर एक गर्व की अनुभूति होती है कि एक चैंपियन हमारे पास भी है. उनके टेस्ट मैचों में सन्यास की खबर ने एक अजीब सा खालीपन भर दिया है.
एकदिवसीय मैचों में उनके मैदान के बाहर सन्यास लिए जाने से उनके प्रसंशक काफी आहत थे. वो सचिन की एक यादगार विदाई चाहते थे जिसके वो हकदार थे. उम्मीद है मैदान में उनकी विदाई ऐसी होगी जैसी कभी किसी की न हुई हो. कुंबले,सौरव, द्रविड़ और लक्ष्मन के बाद सचिन ही आखिरी कड़ी थे जो पिछले पीढ़ी के क्रिकेटर को नई पीढ़ी से जोड़ रहे थे. उनके बताये टिप्स ने न जाने कितने ही नई पीढ़ी के क्रिकेटरों को अपना खेल सुधारने में मदद की. उनकी ड्रेसिंग रूम में मौजूदगी न जाने कितने क्रिकेटरों में जोश भरने का काम करती रही.

देश की एक पूरी की पूरी पीढ़ी सचिन को देखते हुए अब तक का समय बिताया है. इस पीढ़ी पर सचिन के खेल का जबरदस्त जादू था. इस जादू का इस्तेमाल विज्ञापन कम्पनियां ने भी भरपूर किया. सचिन ने हर उस विज्ञापन में काम किया जिसमे उस वक्त के युवाओं रिझाने की जरूरत पड़ी हो. अपने इस लोकप्रियता के कारण सचिन कई सालों तक विज्ञापन में भी नम्बर एक रहे.

उनकी पीढ़ी के सभी क्रिकेटर पहले ही सन्यास ले चुके है. अपनी फिटनेस और फॉर्म की बदौलत सचिन ने उन सभी को अपने से काफी पीछे छोड़ दिया है. उस पीढ़ी के किसी भी खिलाडी का सचिन जैसा लम्बा और चमकदार करियर नहीं रहा. ब्रायन लारा, रिकी पोंटिंग, जैक कैलिस और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों की तुलना सचिन से होती रही मगर सचिन हमेशा प्रशंसकों की नज़र में उनसे बीस ही रहे. उनके रिकॉर्ड प्रशंसकों के नज़रिए को सही भी ठहराते है.

कहा जाता है कि हर रिकॉर्ड बनता है ही टूटने के लिए. हो सकता है कभी सचिन के आंकड़ों के रिकॉर्ड भी टूट जायें मगर लोगों के दिलों पर राज करने का उनका जो रिकॉर्ड है वो शायद ही टूटेगा. अभी दस दिन उन्हें क्रिकेट और खेलना है. एक यादगार विदाई से पहले वो प्रशंसकों को कुछ और बड़े पारियों का मज़ा दे सकते है. सभी प्रशंसक उनसे उनके आखिरी दो मैचों में यही उम्मीद लगाये भी हैं.

उम्मीद है सचिन का बल्ला बरसेगा और हर उस आलोचक को जवाब देगा जो सचिन को सन्यास की सलाह देते रहे. उन्होंने अपने शर्तों पर सन्यास लेकर साबित कर दिया है कि उनका कोई जवाब नहीं है.

आपके आखिरी दो टेस्ट के इंतज़ार में.....

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