नहीं रहे प्राण साहब

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pran.gifकुछ लोग कामयाबी के पीछे भागते है तो कुछ लोगों के पीछे कामयाबी भागती है. पहले वाले खांचे में बहुत सारे लोग मिल जायेंगे पर बाद वाले खांचे में बिरले ही समा पाते हैं. अपनी बड़ी शख्सियत और दमदार आवाज़ के कारण प्राण साहब हमेशा से बाद वाले में रहे. उन्होंने खल चरित्रों में भी इतनी कामयाबी देखी कि नायक भी उनसे इर्ष्या रखने लगे थे. पर सिर्फ खलनायक के रूप में नहीं परदे पर निभाए हर चरित्र में वो कामयाबी दास्तान लिखते गए. भारतीय फिल्म इतिहास की कुछ सबसे बड़ी और कामयाब फिल्मों में उन्होंने काम किया. नायक हो या खलनायक या फिर कोई चरित्र अभिनेता उनके बाद आये सभी कलाकारों ने उनसे कुछ न कुछ सीखा और अपने को बेहतर किया.
प्राण साहब अपने आप में पूरा का पूरा अभिनय का स्कूल थे. उनके संवाद अदायदी की लोग दीवाने रहे. खलनायक के रूप में बोले गए उनके संवाद लोगों में डर और नफरत का भाव जगाते रहे. एक पूरी की पूरी पीढ़ी को अपने अभिनय के दम पर झकझोरने की ताकत सिर्फ प्राण साहब के पास थी. उस पूरी पीढ़ी ने अपने बच्चों का नाम प्राण नहीं रखा. दुनिया के किसी दुसरे कलाकार में ये बात देखने को नहीं मिलती है.

सिर्फ यही नहीं प्राण साहब का गेटअप भी सदा चर्चा में रहा. उन्होंने डाकू से लेकर स्मगलर और भिखारी से लेकर अमीर तक की भूमिकाएं निभाईं. उनके गेटअप से हमेशा वो अपने किरदार ही नज़र आते थे. जंजीर के शेरखान की भूमिका हो या फिर सनम बेवफा के फ़तेह खान या फिर उपकार का मलंग का किरदार. उनके गेटअप ने ही उन किरदारों में जान डाल दी थी. डॉन और मजबूर जैसे महानायक अमिताभ बच्चन के साथ किये गए फिल्म में अपनी छोटी भूमिका के बावजूद कभी नायक से कम नज़र नहीं आये.

प्राण साहब को अपने अंतिम दिनों में भारत में फिल्म सितारों को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मान दादा साहेब फाल्के अवार्ड से सम्मानित किया गया. इससे पहले भी उन्हें पद्मभूषण समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चूका था. पर उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान था जनता का प्यार जो कि उन्हें बेइंतेहा मिला. अपने आखिरी दिनों में भले ही वो स्वास्थ्य सम्बन्धी कारणों के कारण बड़े परदे से दूर रहे मगर चाहने वालों ने उन्हें हमेशा उसी अंदाज़ में उन्हें प्यार दिया.

प्राण साहब तो चले गए पर अपने पीछे वो अभिनय कि वो विरासत छोड़ गए हैं जिसे आने वाली पीढियां भी देखती रहेगी और सीखती रहेगी. आने वाले कलाकार भी ये जानने की कोशिश जरूर करेंगे कि एक खल चरित्र निभाने वाला अभिनेता नायकों से भी लोकप्रिय कैसे हो गया.

अलविदा प्राण साहब...आप हमेशा यादों में रहेंगे.

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