स्पॉट फिक्सिंग का जिन्न

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Bookies-in-IPL.jpgभारत में क्रिकेट के नाम पर जो देखा जा रहा है या यूँ कहे जो परोसा जा रहा है उसके बारे में कई भ्रांतियां फ़ैल रही हैं. स्पॉट फिक्सिंग के नाम पर जिस गडबडझाले का खुलासा हुआ है उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे खेल में सब कुछ जायज है. हर नाजायज़ चीज को जायज बना देना ही आज खेल हो गया है. भ्रष्टाचार का बोलबाला इतना बढ़ गया है कि अब इससे बाहर आने का कोई रास्ता नहीं बच गया है. खिलाडी, राजनीतिज्ञ, उद्योगपति और फ़िल्मी सितारों के बीच ऐसा गठजोड़ बन गया है जिसमे खेल के अलावा भी कई और खेल चल रहे हैं. इन सभी घटनाओं को देखकर बस एक ही प्रश्न मन में उठता है कि क्या ये धोखा है या खेल का ही एक अंग है?
इस सवाल के जड़ में जाना बेहद जरूरी है. अगर ये धोखा है तो ऐसे आयोजन का क्या फायदा और ये अगर खेल का ही एक अंग है तो क्यों न इसे वैधानिक बना दिया जाए. खेलों में सट्टा का लगना या फिर फिक्सिंग कि बात सामने आना कोई नई बात नहीं है. पुरे विश्व में और लगभग हर खेल में इस तरह कि बातें सामने आती रही है. इन सबके पीछे एक ही कारण है और वो है पैसा. ऐसे आयोजन काले धन को सफ़ेद करने का जरिया बनने लगे है.

स्पॉट फिक्सिंग एक ऐसा जरिया बनकर सामने आया है जिसमे कुछ भी साबित करना बड़ा ही मुश्किल है. न तो खिलाडी पैसे लेते-देते पकड़े गए हैं न ही टेलीफोन पर कि गयी बातों का कुछ आधार बनाया जा सकता है. जांच में कुछ साबित अगर खुदा न खास्ते हो भी गया तो संरक्षण देने के लिए तमाम राजनितिक आका मौजूद है ही. ऐसा कोई भी एसोसिएशन भारत में नहीं होगा जिसमे राजनितिक दखलंदाजी नहीं हो. तमाम बड़े-बड़े नेता इन एसोसिएशन के सरपरस्त रह चुके हैं और वर्तमान में भी हैं.

इस खेल में खिलाड़ी काफी पीछे की कतार में होते हैं. आगे की कतार उन लोगों की है जो पैसे वाले हैं. जो पैसे लेते भी हैं और देते भी हैं. पैसे के इस घालमेल का जब तक जांच नहीं होगा तब तक कुछ भी खुलकर सामने नहीं आने वाला है. दिल्ली पुलिस ने किसी को भी क्लीन चिट नहीं दिया है. उनके कमिश्नर ने साफ़ कहा है कि इस जांच में तीन खिलाड़ी ही शामिल थे. मगर क्या दुसरे भी शामिल नहीं हो सकते हैं ये एक बड़ा सवाल है. जो पकड़ा गया वो तो चोर है ही मगर जो नहीं पड़े गए है अब तक क्या उन पर भी नज़रें जायेंगी?

इन मामलों में हमारा रिकॉर्ड बड़ा ही खराब है. पिछली बार जब मैच फिक्सिंग मामले की जांच हुई थी तब कुछ भी निकल कर सामने नहीं आ पाया था. सारे के सारे आरोपी क्रिकेटर बच निकले थे. उनमे से कुछ टेलीविज़न के सितारे बन गए यहाँ तक कि पूर्व कप्तान तो सांसद तक बन गए. इसे देखते हुए ये मानना बड़ा ही मुश्किल है कि आज फंसे इन क्रिकेटरों पर कोई बड़ी आंच आ पाएगी. बीसीसीआई ने भले ही इनपर उम्र भर का प्रतिबन्ध लगा दिया हो पर नतीजा कुछ दिनों बाद क्या होगा ये सोचना ज्यादा मुश्किल नहीं है.

कुछ प्रभावी कदम उठाये जाने कि सख्त जरूरत है. भारत जैसे देश में जहाँ क्रिकेटरों को भगवन बनाकर लोग पूजते है वहां ऐसे स्कैंडल उनके साख पर धब्बा जैसे हैं. कुछ की करनी के कारण हर खिलाड़ी को शक की नज़र से देखने को मजबूर कर देती है. बीसीसीआई को इस बार कुछ न कुछ अलग करना होगा. पिछले बार की गयी लीपा-पोती से इस बार बचना होगा. ऐसा न हुआ तो यूँ लगेगा जैसे खेल का सच और धोखा में कोई फर्क नहीं है.

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