स्पॉट फिक्सिंग का जिन्न II

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CSK-owner.jpgरंगीनियों का मौसम आचानक बेरौनक हो गया है. जिस आईपीएल को उसके खेल, उसकी पार्टियों, उसके तड़क भड़क, और पैसो के कारण जाना जा रहा था, आज लगता है उन सभी पर ग्रहण छा गया है. खिलाडियों के फिक्सिंग विवाद में फंसने के बाद ये विवाद थमता नहीं दिख रहा है. बल्कि ये हर दिन अपने साथ नए-नए खुलासे सामने ला रहा है. ऐसा लग रहा है जैसे सारा आलम ही फिक्स हो. खिलाडी फिक्स, उनके इर्द-गिर्द रहने वाले बॉलीवुड के सितारे फिक्स, अंपायर फिक्स, और अब मालिक भी फिक्स. चेन्नई सुपर किंग्स के सहमालिकों में से एक गुरुनाथ मयप्पन पर लगे आरोप और मुंबई पुलिस की पूछ-ताछ के बाद इस टूर्नामेंट से जुडी सभी चीजें विभत्स नज़र आ रही है.
इस विवाद में एक और नया विवाद जुड़ गया है. सहारा समूह ने पुणे वारियर्स टीम को छोड़ दिया है. वो भारत की क्रिकेट टीम का प्रायोजन भी छोड़ना चाहते है. उनके प्रमुख सुब्रत रॉय ने साफ़ कहा है कि जब तक श्रीनिवासन बोर्ड के अध्यक्ष बने रहेंगे तब तक उनका बोर्ड से जुड़ना मुश्किल है. यानि मुसीबत चौतरफा है. पहले तो जांच में बड़े लोगों के सामने आने के बाद एजेंसियों के हाथ-पैर फुल जाते थे. जांच, जांच न रह कर लीपा-पोती बन जाती थी. पर इस बार केन्द्रीय मंत्री और आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला और अनुशासन समिति के अध्यक्ष अरुण जेटली का नाम भी लिया जा रहा है. उनकी इस टूर्नामेंट के प्रति जिम्मेवारी पर भी नुक्ता-चीनी की जा रही है.

इतने सारे खुलासे और गैर जिम्मेवारी के वाकयात के बावजूद एक अच्छी बात सामने ये आ रही कि आम लोगो का लगाव इस खेल के साथ अभी भी कम नहीं हुआ है. फिक्सिंग विवाद के सामने आने के बावजूद स्टेडियम पहले की तरह खचा-खच भरे रहे. लोग अभी भी क्रिकेट का मज़ा उसी अंदाज़ में लेना चाहते हैं जैसे पहले लेते रहे हैं. यह इस खेल के प्रति लोगों कि दीवानगी को दर्शाता है. वैसे भी देखने के लिए भारत में बहुत कम खेल उपलब्ध हैं. जो दुसरे खेल उपलब्ध है उनका प्रसारण कहीं से भी क्रिकेट के सामने नहीं टिकता. लिहाजा क्रिकेट देखना और उसे सराहने के अलावा यहाँ के लोगों के पास कोई विकल्प भी नहीं है.

इस विवाद में कई दुसरे टीम और क्रिकेटरों के शामिल होने की बात सामने आ रही है. अब इन बातों में कितनी सच्चाई है ये आने वाले दिनों में निकल कर सामने आ ही जाएगा. मगर इस टूर्नामेंट का जितना नुकसान होना था वो लगभग हो चुका है. जिस टूर्नामेंट को भारत का शो-केस कहा जा रहा था अब वही टूर्नामेंट एक परेशानी का शक्ल लेता जा रहा है. अब ये परेशानी कहाँ तक पहुंचेगी ये एक बड़ा सवाल है.

कुछ कड़े सबक सीखने और सिखाये जाने का समय अब आ गया है. जिस खेल ने सब कुछ दिया अब उसे वापस करने का समय भी सामने है. आईपीएल को बचाए रहने के लिए सभी ऐसे लोग जो कि इसे बदनाम कर रहे है उन्हें इससे कोसों दूर कर देने की जरूरत है. हर वो लोग जो खेल के नाम पर खेल खेल रहे है चाहे वो मालिक हो या अधिकारी उन्हें उनकी हद बताये जाने की जरूरत है. खिलाडियों पर गाज तो गिरती ही रही है पर इस विवाद में शामिल अधिकारियों और दुसरे लोगों पर शिकंजा कसे जाने की भी सख्त जरूरत है.

यही वो कदम है जिससे खेल, खेल रह पायेगा. वरना ये एक मनोरंजन तो है ही. खेल और मनोरजन में से खेल को अलग करके ही हम इसे जीतता हुआ देख पायेंगे.

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