मोदी बनाम केजरीवाल

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mnvsak.jpgस्वयंवर की पूरी तैयारी हो चुकी है। दुल्हन सजी-धजी तैयार बैठी है, बारात में आने को लोग तैयार है और दूल्हों का जमावड़ा भी लगभग तय हो चूका है। जी हाँ बात हो रही है काशी नगरी की। चुनाव को लेकर जो सरगर्मियां है वो किसी स्वयंवर से कम नहीं है। नरेंद्र मोदी और अरविन्द केजरीवाल किसी दुल्हे से भी ज्यादा आतुर दिखाई दे रहे हैं और महादेव की नगरी इस रोमांचक मुक़ाबले को देखने के लिए बेताब है। कांग्रेस में उम्मीदवार को लेकर कुछ उहापोह नज़र आ रही है मगर अपुष्ट ख़बरों को अगर सच माना जाये तो दिग्विजय सिंह भी यहाँ से ताल ठोक सकते हैं। अगर उम्मीदवारों कि लिहाज़ से वराणसी को देखा जाए तो ये कहना गलत नहीं होगा कि इस आम चुनाव में जनता की तवज्जो सबसे ज्यादा वाराणसी में ही रहने वाली है।
 तकनीकी लिहाज़ से देखा जाए तो वाराणसी से लड़ने वाले सारे उम्मीदवार बाहरी है। जहाँ नरेंद्र मोदी यहाँ से लड़कर अपने और अपने पार्टी को राष्ट्रव्यापी बनाना चाहते हैं वहीँ अरविन्द केजरीवाल अपने आदत के अनुरूप कुछ ऐसा करना चाहते है जिससे उनका नाम सुर्ख़ियों में बना रहे। नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ना उनके लिए किसी चुनाव जीत जाने से कम भी नहीं है। इस बहाने वो चुनाव परिणामों के आने तक लगातार मीडिया में रह सकते हैं।
 
पर फिलहाल वाराणसी को जो जरूरत है, वो है प्रतिबद्धता की। अभी तक बड़े दलों की ऒर से कोई ऐसा उम्मीदवार साने नहीं आया है जो वाराणसी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाए। नरेंद्र मोदी वाराणसी के साथ-साथ वड़ोदरा की नाव पर भी सवार हैं। वो चुनाव के बाद क्या निर्णय लेंगे ये शायद पता नहीं। अरविन्द ने भी वाराणसी के प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है। उनका ऐसे भी प्रतिबद्धता का कोई खास रिकॉर्ड नहीं है। रही बात दिग्विजय सिंह की तो वो सन्यास के बाद दुबारा वापस आ रहे है ऐसा कोई कारण नहीं कि वो हारने के बाद दुबारा सन्यासी नहीं बन जाए। बनारस की नगरी इसके लिए मुफीद भी है।
 
चुनावी चर्चा बिना आरोप प्रत्यारोप के पूरा नहीं होते। केजरीवाल ने तो पहले से ही अपनी कमर कास ली थी। मगर नरेंद्र मोदी जो कि अब तक केजरवाल के सवालों पर खामोश थे, अब जवाब देना शुरू कर दिया है। वो सिर्फ जवाब ही नहीं दे रहे है बल्कि एक कदम आगे जाकर अरविन्द केजरीवाल को एके -49 कि उपड़ी भी दे डाली। कश्मीर से लेकर दिल्ली तक अपने रैलियों में मोदी ने केजरीवाल पर निशाना साधकर वाराणसी के मुकाबले में नया मोड़ दे दिया है।

एक और कोण है बनारस में मुख़्तार अंसारी का। उन्होंने भी अपनी दावेदारी और जीत का एक साथ एलान किया है। यानि कुल मिलकर मुकाबला देखने लायक होगा।और अब सिर्फ 16 मई ही तय कर सकता है कि ऊंट किस करवट बैठेगा। 

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