भ्रष्ट नेताओं की सूची

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arvind-kejriwal.jpgचुनावों की राजनीति में अपने पैर जमाने की आम आदमी पार्टी पूरी कोशिश कर रही है। अपने पहले ही प्रयास में दिल्ली की गद्दी पर बैठ जाने वाली आम आदमी पार्टी पुरे देश में अब अपना आधार भांपने कि कोशिश में लग गयी है। उनके हर नेता का यही प्रयास दिख रहा है कि वो कैसे राष्ट्रीय परिदृश्य में अपने आप को उभारें। पहले कुमार विश्वास द्वारा राहुल गांधी को चुनौती दिया जाना और उसके बाद अरविन्द केजरीवाल का सुशील कुमार शिंदे पर प्रहार इसी प्रयास की कड़ी भर है। अब इन प्रयासों से आगे बढ़ कर अरविन्द केजरीवाल ने सभी दलों के तथाकथित भ्रष्टाचारियों कि एक सूचि जारी की है। भले ही इस सूचि में मौजूद लोगों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत आम आदमी पार्टी या अरविन्द केजरीवाल के पास नहीं है पर फिर भी इलज़ाम लगाने में कोताही नहीं बरता गया है।
इस लिस्ट में राहुल गांधी और नितिन गडकरी जैसे नेताओं के नाम भी हैं। अरविन्द इन्हे निशाने पर लेकर निश्चित तौर पर अपना आधार बढ़ाना चाहते हैं। संगठन मजबूत न होने के कारण वो स्थानीय लोगों का मदद लेकर ऐसे नेताओं से लड़ना चाहते हैं। ऐसा कर वो इन बड़े नेताओं के विरोधियों को अपने पार्टी में शामिल करना चाहते हैं और अपना आधार बढ़ाना चाहते हैं। छोटे दौर के लिए तो इससे कुछ पाया जा सकता है मगर उनकी ये रणनीति क्या लम्बे समय के लिए कामयाब रहेगी ये देखने वाली बात होगी। बिनोद कुमार बिन्नी का उदाहरण सामने है जो की कई दलों में रहने के बाद आम आदमी पार्टी में आये थे। ऐसे कई लोगों के आ जाने के बाद पार्टी कैसे निपटेगी ये भी देखना दिलचस्प होगा।

दिल्ली में सरकार को चलते हुए एक महीना गुजर चूका है मगर अरविन्द के खाते में वैसी कोइ सफलता नहीं आयी जिसकी दिल्लीवासियों ने उम्मीद की थी। इसके विपरीत कई मोर्चों पर वो विपक्षी दलों और मीडिया के निशाने पर रहे हैं। यहाँ तक कि उनके क़ानून मंत्री सोमनाथ भर्ती के खिलाफ अदालत में भी केस दर्ज हुआ है। ऐसे में अरविन्द केजरीवाल का लिस्ट जारी करना और भी सवाल खड़े करता है। क्या इसे शासन पर से ध्यान हटाने के लिए जारी किया गया है ? क्या अरविन्द ऐसे लिस्टों के द्वारा लोकसभा चुनाव की समर को पार कर सकते हैं ?

बहुत सारे लोग इसे आम आदमी पार्टी का मारो और भागो वाली नीति का विस्तार बता रहे हैं। किसी गम्भीर या तार्किक परिणिति कि उम्मीद बहुत कम लोग लगा रहे हैं। पर अगर सब इसी तरह चलता रहा तो आम आदमी पार्टी कि छवि पर गम्भीर खतरा हो सकता है। उसके रणनीतिकार भी बखूबी जानते होंगे कि ऐसे लिस्ट जारी कर वो सनसनी तो पैदा कर सकती है मगर लम्बे समय तक जनता को जोड़े नहीं रख सकती है। जनता को लगातार जोड़े रखने के लिए उसे इन लिस्टों से परे और भी कई मुद्दे तलाशने होंगे जो इस विशाल देश की जनता को जोड़े रख सकें।

समय रहते पूरी उम्मीद है कि आम आदमी पार्टी, अरविन्द केजरीवाल और योगेन्द्र यादव ऐसे मुद्दों को जरूर जनता के सामने पेश करेंगे। साथ ही  पार्टी अपनी रणनीतियों में विभिन्न क्षेत्रों में रह रही जनता के मूलभूत मुद्दों पर अपना ध्यान लगाएगी। उनके बड़े नेता देश के विभिन्न हिस्सों में जायेंगे, जनसभाएं करेंगे। ऐसा कर ही वो अपना आधार बढ़ा सकती है वरना सूचि जारी वाले और भी बहुत सारे लोग अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे होंगे।

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