तरुण तेजपाल की गिरफ्तारी

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tarun-tejpal.jpgकहते हैं कि न्याय पाना सभी का संवैधानिक अधिकार है। पर कई बार न्याय पाने के लिए भारी मशक्कत करना पड़ता है। इसके लिए हिम्मत जुटानी पड़ती है, समाज के तथाकथित नामी-गिरामी लोगो से लड़ना पड़ता है। तहलका के तरुण तेजपाल के खिलाफ अपनी शिकायत दर्ज करने के बाद उस बहादुर लड़की को भी भारी मशक्कत करना पड़ रहा है। तरुण तेजपाल पुलिसिया गिरफ्त में आ तो जरूर गए हैं मगर इससे बचने के लिए उन्होंने जो रास्ते अपनाये है उससे ये एहसास हो जाता है कि न्याय पाने की डगर आसान नहीं रहने वाली है। पर न्याय की आस लगाये लड़की की हिम्मत देखकर लगता है कि देर-सवेर ही सही न्याय जरूर मिलेगा।
गोआ पुलिस को 6 दिनों के लिए तरुण तेजपाल कि हिरासत मिल गयी है। इस प्रकार के केस में तरुण का पुलिस को दिया गया बयान महत्वपूर्ण होगा।

इस प्रकार के अपराध करने वाले व्यक्ति को शायद ये बात लगता होगा कि लड़कियां अपनी समस्या दूसरों को नहीं बतायेंगी। और कई बार ऐसा होता भी है। कभी समाज के रवैये कि वजह से तो कभी आर्थिक हालात की वजह से। इस कारण ऐसे अपराध करने वाले बचते रहे हैं और कभी-कभी तो तो वो बार-बार ऐसे अपराध करते हैं। उनके मन से ये भय निकल जाता है कि कोई उनकी शिकायत भी कर सकता है। तथाकथित नामी-गिरामी लोग को तो और भी भय नहीं होता। उन्हें लगता है कि ऐसे अपराध करने के बावजूद वो अपने राजनितिक रसूखों के कारण बच निकल जायेंगे। पर अपराध छुपता नहीं है। वो किसी न किसी बहादुर इंसान के सहारे बाहर आता ही है। और इस बार बीड़ा है उस बहादुर लड़की हाथों में।

इस मामले ने दिखाया है कि किस तरह व्यक्ति के दो रूप होते है। एक समाज में अपनी जगह और रुतबा बनाये रखने के लिए तो दूसरा अपने को हर हाल में हिफाजत के लिए। तरुण तेजपाल ने भी अपने को बचाने की भरसक कोशिश की। उन्होंने लड़की के नियत और चरित्र के बारे में सवाल उठाने से भी गुरेज़ नहीं किया। एक व्यक्ति और उसका संस्था जो हमेशा से लोकतंत्र और महिलाओं के अधिकार के बारे बोलता बढ़-चढ़ कर बोलता रहा हो उससे अदालतों में ऐसी छोटी टिपण्णी की उम्मीद शायद किसी को न रही होगी।

तरुण अब पुलिस के पास हैं। उनके राजनीतिक रंग देने के बावजूद भारत का एक बड़ा वर्ग इसमें कोई ख़ास राजनीति नहीं देख रहा है। राजनीति इस अपराध के इर्द-गिर्द सारे विषयों पर हो सकती है पर इस अपराध को छुपाने या बढ़ाने के लिए कोई राजनीति हो रही हो ऐसा लगता नहीं है। वैसे भी हमारे देश में गम्भीर से गम्भीर मुद्दा भी बिना किसी राजनितिक बयानबाज़ी के पूरा नहीं होता। इसके किये हमारी राजनितिक संस्कृति जिम्मेवार है जो कि समय बीतने के साथ और भी अधकचरी होती जा रही है।

आज देश युवाओं का है, नए विचारों का है। इसलिए आगे उम्मीद है हमारी राजनितिक संस्कृति बदले। वो नए मानदंड स्थापित करे जहाँ अपराध और राजनीति में पर्याप्त दुरी दिखे। अपने फायदे के लिए राजनीति का इस्तेमाल न हो। ये केस इसमें मील का पत्थर साबित होगा। एक सफल और सक्षम रहे इंसान पर इलज़ाम लगाना आसान नहीं रहा होगा। हमें इस जज्बे को सलाम करना होगा। हमें हर उस युवा तो सलाम करना होगा जो जुल्म से लड़ने की हिम्मत दिखाता है।

अगर ऐसा हम कर सके तो जल्द ही हम बदलेंगे और जल्द ही देश बदलेगा।

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