आम आदमी पार्टी पर सवाल

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AAP.jpgराजनीति की परिभाषा इस चुनावी माहौल में आरोप-प्रत्यारोप और छींटाकशी तक सीमित हो गया है। इस माहौल का असर सभी पार्टियों पर है। दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव में इसका असर सबसे ज्यादा है। यहाँ मैदान में उतरने वाली तीनो बड़ी पार्टियां एक-दुसरे पर कीचड़ उछालने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है। हालिया मीडिया सरकार का किया गया स्टिंग ऑपरेशन इस माहौल को और गन्दा कर रहा है। आम आदमी पार्टी पर किये गए इस स्टिंग ऑपरेशन के बाद पार्टी के नेताओं ने दुसरे दलों पर कुछ गम्भीर इलज़ाम लगाये हैं।
राजनीति में सुचिता लाने के नाम पर बनी आम आदमी पार्टी को अब सही मायनों में राजनीति का मतलब पता चल रहा होगा। अब तक दूसरों को बाहर से नसीहत दे रही आम आदमी पार्टी खुद पर लगे नैतिक इल्ज़ामों से कैसे निपटेगी इसकी एक झलक दिख गयी है। उनके सबसे बड़े नेता अरविन्द केजरीवाल ने मीडिया और दोनों राष्ट्रीय दल पर मिलीभगत का इलज़ाम लगाया है। इसके सबूत उन्होंने अभी तो दिए नहीं है पर शायद उन्हें कुछ पुख्ता जानकारी हो।

सवाल यहीं से उठ खड़ा होता है कि क्या केवल जानकारी के आधार पर कीचड़ उछालने का हक़ होना चाहिए ? क्या सबूतों के बिना बातें करके अरविन्द केजरीवाल और आम आदमी पार्टी अपनी साख कम नहीं कर रहे ? क्या मीडिया सरकार से सबूत मांगने वाले केजरीवाल और उनके पार्टी को बिना सबूत के अनुरंजन झा पर पैसे लेने का आरोप नहीं लगाना चाहिए था। सवाल तो उठेंगे ही, आखिर अपना स्तर आम आदमी पार्टी ने खुद ही तय किया है।

सुचिता के विषय पर उन्होंने सभी पार्टियों को काफी कोसा है। कई दफे तो वो अपने आप को इस देश के सबसे ईमानदार बताने में भी पीछे नहीं हटे है। पर इस चुनावी माहौल में उन पर कोई भी अगर इलज़ाम लगे है तो क्या उन्हें सब्र के साथ जनता के बीच नहीं आना चाहिए था ? क्या वो ऐसा कर सचमुच कांग्रेस और भाजपा के जाल में नहीं फंस रहे हैं ? ये सवाल भी उतने ही महत्वपूर्ण है।

कुछ हो या न हो पर इस स्टिंग ऑपरेशन ने आम आदमी पार्टी के कुछ बड़े नेताओं कुमार विश्वास और शाजिया इल्मी को नैतिकता के कटघरे में खड़ा किया हैं। और मीडिया नेताओं को अक्सर खड़ा करती भी हैं। अब जनता को कैसे भरोसा दिलाना है ये आम आदमी पार्टी का काम है, क्योंकि मीडिया सरकार को तो चुनाव लड़ना नहीं है।

इलज़ाम और सफाइयों का दौर चुनाव परिणाम आने तक थमने के आसार नहीं हैं। जो इस माहौल में जनता के बीच विश्वास बनाये रखने में कामयाब हो गया वही आने वाले परिणामों में सिकंदर बन कर उभरेगा।

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